आज आपको मिलवाते हैं एक और ठेकेदार से। भारत में हर साल दुनिया भर में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जाती हैं। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग एंड रिसर्च सेंटर (NTPRC) के विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में विकसित देशों के तुलना में सड़क दुर्घटना की दर तीन गुणा से भी ज्यादा है। भारत में प्रति 1000 वाहनों में से 35 वाहन दुर्घटनाग्रत होते हैं जबकि विकसित देशों में ये दर प्रति एक हज़ार मात्र 4 से 10 है। इसी बीच एक आदमी ऐसा भी है जो अपने अलग तरह के मिशन में लग हुआ है। एक ऐसा शख्स जो यातायात को नियंत्रित करने में अपना योगदान दे रहा है। मुकुल चन्द्र जोशी की उम्र है तो 74 साल लेकिन फिर भी वो अपनी उम्र के तमाम लोगों से अलग है। उसकी ये अलग पहचान सुरक्षा बाबा के नाम से है। यही उसकी खासियत है जो दूसरे लोगों से इसे अलग करती है। दिल्ली से लगते शहर में भारी ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ये आदमी गांधीगीरी के माध्यम से लोगों सड़क सुरक्षा के बारे में बताता है।
सेवानिवृति के बाद जोशी सी समाज सेवा करना चाहते थे। लेकिन वो कुछ अलग करना चाहते थे। लेकिन ये कैसे करना था और उन्हें क्या करना था, उन्हें ये मालूम नहीं था। तभी एक दुखद घटना ने जोशी जी को सुरक्षा बाबा में बदल दिया। उन्होंने एक रोचक तरीके से अपना नाम सुरक्षा बाबा रख दिया। उसके बाद उन्होंने 2004 में एएसपी से यातायात नियंत्रण के लिए अनुमति मांगी। "उनकी प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक थी। मैंने अधिकारियों की सहमति के साथ अगले दिन से ही अपना मिशन शुरु कर दिया। शुरू में थोड़ा डर भी लगा। मेरी पत्नी ने मुझे चेताया कि मैं उहास का पात्र भी बन सकता हूं। लेकिन मैं आगे बढ़ा, मैं बहुत हठी हूं" जोशी ने कहा.
जोशी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालें के प्रति एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा, "लोगों की भीड़ के साथ काम करने में खतरा बहुत है। इसलिए मैंने गांधीगीरी का रास्ता अपनाया और आजतक मुझे कोई समस्या नहीं आई। वह हर रोज़ एक घंटे के लिए सप्ताह में छह दिन अलग-अलग जगहों पर यातायात प्रबंधन करते हैं। इसके लिए वह संकेतों का सहाला लेते हैं। मुख्यत: वह नोएडा में ये काम करते हैं लेकिन कई बार दिल्ली में यातायात नियंत्रण में सहयोग करते हैं। "उन्होंने कहा कि वो कभी आदेश नहीं देते बल्कि अनुरोध करते हैं और लोग भी चामत्कारिक ढंग से उनका कहना मानते हैं। उन्हें ये अपने अभियान का फल लगता है।
सेवानिवृति के बाद जोशी सी समाज सेवा करना चाहते थे। लेकिन वो कुछ अलग करना चाहते थे। लेकिन ये कैसे करना था और उन्हें क्या करना था, उन्हें ये मालूम नहीं था। तभी एक दुखद घटना ने जोशी जी को सुरक्षा बाबा में बदल दिया। उन्होंने एक रोचक तरीके से अपना नाम सुरक्षा बाबा रख दिया। उसके बाद उन्होंने 2004 में एएसपी से यातायात नियंत्रण के लिए अनुमति मांगी। "उनकी प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक थी। मैंने अधिकारियों की सहमति के साथ अगले दिन से ही अपना मिशन शुरु कर दिया। शुरू में थोड़ा डर भी लगा। मेरी पत्नी ने मुझे चेताया कि मैं उहास का पात्र भी बन सकता हूं। लेकिन मैं आगे बढ़ा, मैं बहुत हठी हूं" जोशी ने कहा.
जोशी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालें के प्रति एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा, "लोगों की भीड़ के साथ काम करने में खतरा बहुत है। इसलिए मैंने गांधीगीरी का रास्ता अपनाया और आजतक मुझे कोई समस्या नहीं आई। वह हर रोज़ एक घंटे के लिए सप्ताह में छह दिन अलग-अलग जगहों पर यातायात प्रबंधन करते हैं। इसके लिए वह संकेतों का सहाला लेते हैं। मुख्यत: वह नोएडा में ये काम करते हैं लेकिन कई बार दिल्ली में यातायात नियंत्रण में सहयोग करते हैं। "उन्होंने कहा कि वो कभी आदेश नहीं देते बल्कि अनुरोध करते हैं और लोग भी चामत्कारिक ढंग से उनका कहना मानते हैं। उन्हें ये अपने अभियान का फल लगता है।
जोशी अब एक हस्ती बन चुके हैं। उनके पास कई रोचक और दिल को छू जाने वाले अनुभव हैं। लेकिन उनका मिशन खत्म नहीं हुआ है। वो स्कूली बच्चों को यातायात नियमों के बारे में जानकारी देने का लक्ष्य रखते हैं। इस उतार चढ़ाव के बावजूद जोशी जी का कहना है कि वह जो भी काम कर रहे हैं उससे उन्हें परम संतोष मिलता है। जोशी जी कहते हैं "जब मैं इस काम को करके घर लौटता हूं और आराम करता हूं तो मुझे इस बात का बहुत संतोष होता है कि मैंने समाज के लिए कुछ किया। और मुझे लगता है कि मैंने अगर एक एक्सिडेंट को भी टाला है तो मैं अपने मकसद में कामयाब हुआ हूं।"
