आप भी ठेका ले सकते हैं, इसके लिए आपको kalamkasipahi@gmail.com पर टेंडर भेजना होगा

शनिवार, 22 अगस्त 2009

कमाल के ठेकेदार...

आज आपको मिलवाते हैं एक और ठेकेदार से। भारत में हर साल दुनिया भर में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जाती हैं। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन प्लानिंग एंड रिसर्च सेंटर (NTPRC) के विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में विकसित देशों के तुलना में सड़क दुर्घटना की दर तीन गुणा से भी ज्यादा है। भारत में प्रति 1000 वाहनों में से 35 वाहन दुर्घटनाग्रत होते हैं जबकि विकसित देशों में ये दर प्रति एक हज़ार मात्र 4 से 10 है। इसी बीच एक आदमी ऐसा भी है जो अपने अलग तरह के मिशन में लग हुआ है। एक ऐसा शख्स जो  यातायात को नियंत्रित करने में अपना योगदान दे रहा है। मुकुल चन्द्र जोशी की उम्र है तो 74 साल लेकिन फिर भी वो अपनी उम्र के तमाम लोगों से अलग है। उसकी ये अलग पहचान सुरक्षा बाबा के नाम से है। यही उसकी खासियत है जो दूसरे लोगों से इसे अलग करती है।  दिल्ली से लगते शहर में भारी ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए ये आदमी गांधीगीरी के  माध्यम से लोगों सड़क सुरक्षा के बारे में बताता है।

सेवानिवृति के बाद जोशी सी समाज सेवा करना चाहते थे। लेकिन वो कुछ अलग करना चाहते थे। लेकिन ये कैसे करना था और उन्हें क्या करना था, उन्हें ये मालूम नहीं था। तभी एक दुखद घटना ने जोशी जी को सुरक्षा बाबा में बदल दिया। उन्होंने एक रोचक तरीके से अपना नाम सुरक्षा बाबा रख दिया। उसके बाद उन्होंने 2004 में एएसपी से यातायात नियंत्रण के लिए अनुमति मांगी। "उनकी प्रतिक्रिया बहुत ही सकारात्मक थी। मैंने अधिकारियों की सहमति के साथ अगले दिन से ही अपना मिशन शुरु कर दिया। शुरू में थोड़ा डर भी लगा। मेरी पत्नी ने मुझे चेताया कि मैं उहास का पात्र भी बन सकता हूं।  लेकिन मैं आगे बढ़ा, मैं बहुत हठी हूं" जोशी ने कहा. 
 
जोशी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालें के प्रति एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा, "लोगों की भीड़ के साथ काम करने में खतरा बहुत है। इसलिए मैंने गांधीगीरी का रास्ता अपनाया और आजतक मुझे कोई समस्या नहीं आई। वह हर रोज़ एक घंटे के लिए  सप्ताह में छह दिन अलग-अलग जगहों पर यातायात प्रबंधन करते हैं। इसके लिए वह संकेतों का सहाला लेते हैं। मुख्यत: वह नोएडा में ये काम करते हैं लेकिन कई बार दिल्ली में यातायात नियंत्रण में सहयोग करते हैं। "उन्होंने कहा कि वो कभी आदेश नहीं देते बल्कि अनुरोध करते हैं और लोग भी चामत्कारिक ढंग से उनका कहना मानते हैं। उन्हें ये अपने अभियान का फल लगता है।
 
जोशी अब एक हस्ती बन चुके हैं। उनके पास कई रोचक और दिल को छू जाने वाले अनुभव हैं।  लेकिन उनका मिशन खत्म नहीं हुआ है। वो स्कूली बच्चों को यातायात नियमों के बारे में जानकारी देने का लक्ष्य रखते हैं। इस उतार चढ़ाव के बावजूद जोशी जी का कहना है कि वह जो भी काम कर रहे हैं उससे उन्हें परम संतोष मिलता है।  जोशी जी कहते हैं "जब मैं इस काम को करके घर लौटता हूं और आराम करता हूं तो मुझे इस बात का बहुत संतोष होता है कि मैंने समाज के लिए कुछ किया। और मुझे लगता है कि मैंने अगर एक एक्सिडेंट को भी टाला है तो मैं अपने मकसद में कामयाब हुआ हूं।"

सोमवार, 13 जुलाई 2009

ई-गुरु राजीव का ब्लॉग हैक हो गया है?

आज यूं ही ई-गुरु राजीव के ब्लॉग पर गया। अजीब हाल है, उसमें लव यू नाम से मैसेज ब्लिंक हो रहा है। फॉन्ट साइज़ भी असामान्य है। मुझे लगता है कि क्रांतिकारी ब्लॉग को हैक कर लिया गया है। अगर ऐसा है तो ये दुख की बात है। दुआ करता हूं कि ये कोई तकनीकी गड़बड़ी ही हो। आप भी चेक करें

http://www.blogspundit.blogspot.com/

रविवार, 3 मई 2009

ब्लॉग क्या है?

कई लोग ब्लॉग का अर्थ नहीं जानते। नए लोग भी पूछते हैं कि ब्लॉग है क्या। उनके लिए सीधे-सपाट शब्दों में पेश है ब्लॉग का अर्थ:

ब्लॉग एक व्यक्तिगत डायरी है. एक दैनिक प्रवचन मंच. एक सहयोगपूर्ण स्थान. एक राजनैतिक सोपबॉक्स. एक ताज़ा समाचार आउटलेट. लिंकों का एक संग्रह. आपके अपने निजी विचार. दुनिया को दिए जाने वाली ज्ञापन.
आपका ब्लॉग वैसा ही है जैसा आप उसे चाहते हैं. ऐसे लाखों हैं, सभी आकृति और आकारों में, और वास्तव में कोई खास नियम नहीं हैं.
सामान्य शब्दों में, ब्लॉग एक वेब साइट है, जहाँ आप नियमित तौर पर सामग्री लिखते हैं. नई सामग्री सबसे ऊपर दिखती है, ताकि आपके विजिटर पढ़ सकें कि नया क्या है. इसके बाद वे उस पर टिप्पणी कर सकते हैं या उसे लिंक कर सकते हैं या आपको ईमेल कर सकते हैं. या नहीं.
1999 में Blogger के लांच होने के बाद से, ब्लॉगों ने वेब के पूरे स्वरूप को ही बदल डाला, राजनीति को प्रभावित किया, पत्रकारिता को हिलाकर रख दिया, और इसने लाखों लोगों को अपनी आवाज़ उठाने और अन्य लोगों के साथ जुड़ने में सहायता की.
ब्लॉग वेब पर आपको अपनी आवाज़ देता है. यह वह स्थान है जहाँ आप जो चीजें आपको रुचिकर लगती हैं उन्हे संग्रहीत और साझा कर सकते हैं फिर चाहे वो आपकी राजनीतिक टिप्पणियाँ हों, कोई व्यक्तिगत डायरी हो, या उन वेब साइटों के लिंक हों जिन्हे आप याद रखना चाहते हैं.
बहुत से लोग बस अपने विचारों को व्यवस्थित करने के लिए ब्लॉग का प्रयोग करते हैं, जबकि दूसरे प्रभावकारी, पूरी दुनिया के हजारों लोगों पर अपनी छाप छोड़ते हैं. प्रोफेशनल और शौकिया पत्रकार ब्लॉगों का उपयोग नवीनतम समाचार प्रकाशित करने के लिए उपयोग करते हैं, जबकि व्यक्तिगत पत्रकार अपने अंदरूनी विचारों की अभिव्यक्ति के लिए.
आपको जो भी कहना हो, ब्लॉग आपको वह कहने में मदद कर सकता है.
ब्लॉगिंग का मतलब अपने विचारों को वेब पर प्रस्तुत करने से कुछ अधिक है. यह ऐसे किसी भी व्यक्ति के साथ जुड़ने और उनकी सुनने के बारे में है, जो आपके कार्य को पढ़ता है और उसकी प्रतिक्रिया देने का प्रयास करता है. ब्लॉगर के साथ, आप नियंत्रित करते हैं कि कौन आपके ब्लॉग को पढ़ और लिख सकता है अपनी बातें या तो कुछ ही मित्रों को या फिर सारी दुनिया को बताएँ.
ब्लॉगर की टिप्पणियाँ के द्वारा कोई भी, कहीं से भी आपके संदेशों पर प्रतिक्रिया दे सकता है. आप इस बात का चयन कर सकते हैं कि संदेश-दर-संदेश के आधार पर टिप्पणियां स्वीकार करें या नहीं, और आप किसी भी ऐसी टिप्पणी को हटा सकते हैं, जो आपको पसंद नहीं है.
पहँच नियंत्रणों से आप यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपके ब्लॉग को कौन पढ़ सकता है और कौन उस पर लिख सकता है. छोटी टीमों, परिवारों और अन्य समूहों के लिए एक ज़बर्दस्त संचार उपकरण के रूप में आप एकाधिक लेखकों के समूह ब्लॉग का उपयोग कर सकते हैं. या फिर इकलौते लेखक के रूप में सामाचार संग्रह, संपर्क संग्रह करने और अपने विचारों को अपनी इच्छानुसार अधिकाधिक लोगों के साथ बांटने के लिए आप निजी ऑनलाइन स्थान भी बना सकते हैं
ब्लॉगर प्रोफ़ाइल आपको उन लोगों और ब्लॉगों को खोजने में मदद करते हैं जिनकी रूचियाँ आपके जैसी हैं. आपका ब्लॉगर प्रोफ़ाइल, जहाँ आप अपने ब्लॉगों, अपनी रुचियों, और बहुत कुछ को सूचीबद्ध करते हैं, दूसरे लोगों को आपको खोजने में मदद करता है (पर तभी जब आप चाहते हों कि आपको खोजा जा सके).


साभार: ब्लॉगर

मंगलवार, 28 अप्रैल 2009

सभी ब्लॉगर एकजुट हो...

हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले ब्लॉगर और प्रसिद्ध ग़ज़ल लेखक प्रकाश बादल जी का ब्लॉग जगत से विदाई लेना बहुत दुखद है। हिमाचल की हिमाच्छादित वादियों में रहने वाले प्रकाश बादल का दिल हिम की तरह ही स्वच्छ और उजला है। लेकिन हिम ही कि तरह कोमल भी कि ज़रा सा आरोपों का ताप नहीं सह पाए और ब्लॉगिंग को विदा कह दिया। पहाड़ी राज्यों के लोगों की बात की जाए तो बेचारे बहुत सीधे होते हैं। मैदानी इलाकों के निवासियों की तरह तेज़ नहीं होते। इतने संवेदनशील होते हैं कि किसी भी बात को दिल से लगा बैठते हैं। लेकिन जिस तरह का आरोप उनपर लगाया गया था उससे उनका आहत होना लाजिमी था। भड़ास ब्लॉग एक विवादास्पद ब्लॉग है। अगर आप उसके सदस्यों में से ध्यान दें तो ज्यादातर लोग फेक दिखते हैं। कुछ मानसिक अवसादी और खुराफाती.... मानसिक विकलांगों का ब्लॉग लगता है वह। ऐसे लोग जिन्हे कोई मतलब नहीं है...., ब्लॉगिंग से उनका उद्देश्य न तो मनोरंजन देना है, न ही परिचर्चा करना और नहीं कोई रचनात्मक कार्य करना। शायद वो लोग इसके योग्य ही न हों। सिर्फ कीचड़ उछालने का काम करते हैं। हां, उस ब्लॉग में कई लोग हैं जो अच्छा लिखते हैं। खैर, वो ब्लॉग कैसा है, कौन उसके सदस्य हैं इससे हमें कुछ नहीं लेना देना। वो अपनी भड़ास निकालते रहें, हमें कोई मतलब नहीं। लेकिन समस्या तब पैदा हो जाती है जब वो किसी और पर सिर्फ इस बात को लेकर भड़ास निकालें क्योंकि वो उनसे सौ दर्ज़ा बेहतर लिखता है। आपत्ति हमें तब है जब कोई किसी के खिलाफ षडयंत्र रच दे। मुझे फालतू की बहसों और बेकार के मुद्दों में पड़ने की आदत नहीं। मुझे पता है कि इस लेख के बाद मेरे खिलाफ भी कुछ अंट-शंट लिख सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके मैं लिखूंगा। क्योंकि ग़लत अपन के बर्दाश्त से बाहर है...। इस बात को साबित करने के लिए प्रकाश बादल पर फर्ज़ी आरोप लगाया है.... कोई आईटी विशेषज्ञ या डिटेक्टिव होने की ज़रूरत नहीं। बस ज़रा सा ध्यान देने की ज़रूरत है, सब साफ हो जाएगा।

1. जिस सी-बॉक्स चैट गैजेट पर प्रकाश बादल के नाम से गलत लिखा गया है, वो गैजेट प्रकाश बादल के ही ब्लॉग पर लगा है। ज़ाहिर है कोई भी अपने ब्लॉग पर गाली नहीं लिखेगा। अगर किसी को दूसरे के ब्लॉग पर जाकर गाली लिखनी है तो वह बेनामी होकर गाली लिख सकता है। कम से कम किसी प्रसिद्ध व्यक्ति को गाली लिखनी है तो वह अपने नाम का प्रयोग तो करेगा नहीं।

यही है आरोप वाला स्नैपशॉट


2. ऊपर जो चित्र है वो भड़ास ब्लॉग पर फरहीन नाम के सदस्य ने जो आरोपवाली पोस्ट लिखी है, उसमें लगाया है। इसी को आधार बनाकर मैं एक बात साफ करना चाह रहा हूं। उस सी बॉक्स में फरहीन ने खुद जो कमेंट किया है वह आक्रामक भाषा है। एक और ध्यान देने वाली बात। फरहीन ने जिस समय ये कमेंट पोस्ट किया है वह है 13 Apr 9, 9:13
और ध्यान दें... प्रकाश बादल के नाम से जो कमेंट किया है उसका समय है 13 Apr 9. 9:18
यानि दोनों कमेंट्स के बीच महज 5 मिनट का फासला... ऐसा तो है नहीं कि प्रकाश बादल किसी के कमेंट का इंतज़ार कर रहे थे और फिर तुरंत ही उन्होंने उत्तर भी दे दिया। साफ है ये सारी कारस्तानी फरहीन नामक सदस्य की है....... और फरहीन की प्रोफाइल भी फर्ज़ी प्रतीत होती है जो किसी लड़ने ने बनाई हुई है। वरन् लड़की इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल नहीं करती।

3. ऊपर वाले प्रकरण के कुछ ही समय में भड़ास ब्लॉग पर आरोप वाली पोस्ट छपती है। ( हालांकि दोनों के समय में एक दिन का फर्क है लेकिन ये फर्क सिर्फ GMT टाइमिंग सेट करने में हुई कमी से है)। चलिए अगर मान लिया जाए कि फरहीन के कमेंट के बाद प्रकाश बादल ने कमेंट कर भी दिया तो फरहीन को इतनी जल्दी कैसे पता चला ? क्या  वह प्रकाश के ब्लॉग की निगरानी रख रहा था। अगर हां तो क्या क्यों? फरहीन की प्रोफाइल नकली लग रही है।  पूरा शक जाता है उस शख्स पर जो कि आरोप वाली पोस्ट के छपने के 10 मिनट के अंदर कमेंट करते हैं। प्रकाश बादल के नाम से किए कमेंट, फरहीन की आरोप वाली पोस्ट और उस शख्स की भाषा शैली एक समान प्रतीत होती है।


मेरा उद्देश्य ब्लॉगर्स के बीच विवाद पैदा नहीं करना है। मैं चाहता हूं कि छद्म आवरण ओढ़ कर बैठे इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इन घटिया ब्लॉग्स, जिनका काम दूसरों पर कीचड़ उछालना है, ब्लॉग एग्रिगेटर्स को चाहिए कि इन के अपडेट्स दिखाना बंद करें। वरन् इस तरह के लोग हिन्दी ब्लॉग दुनिया को भी बर्बाद करके रख देंगे। इसके अलावा प्रकाश बादल जी से अनुरोध है कि एक बार फिर आएं ब्लॉग जगत में। ईर्ष्या करने वालों की परवाह न करें। वो आप जैसे सात जन्म नहीं बन सकते। आप खुद को मज़बूत बनाएँ और निरंतर आगे बढ़ें। सभी ब्लॉगर मित्रो से प्रार्थना है कि घटिया लोगो के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों। जय हिन्द...

शनिवार, 25 अप्रैल 2009

श्रीराम सेना और दूसरे हिन्दूवादी संगठन कांग्रेस की देन

जी हां, ये चटपटा शीर्षक देकर पाठक खींचने की कोशिश नहीं है। और ऐसा करने से फायदा भी क्या होगा। हमारा मकसद तो सच को सामने रखना है। ये बात सुनने पढ़ने में भले ही ये बात अजीब लगे। लेकिन । ये हकीकत है... एक ऐसा सच जिसे हर कांग्रेसी को स्वीकार करना चाहिए। दरअसल इन हिन्दूवादी और मुस्लिम चरमपंथियों के लिए कांग्रेस का 50 साल का शासन है। हर किसी को अच्छी शिक्षा और रोज़गार देने में नाकायाब रहने के कारण लोगों के पास कोई काम नहीं है। और कहते हैं न कि खाली दिमाग शैतान का घर
ठीक उसी तरह इन लोगों ने खुराफात करने के लिए ऐसे संगठन बना लिए हैं। इन लोगों का न तो सामाजिकता में कोई योगदान है और नही राष्ट्र निर्माण में। हां, सोसाइटी के कैंसर हैं ये....

सोमवार, 20 अप्रैल 2009

क्षमा करें लेकिन मैं वोट नहीं दूंगा...


दोस्तों वोट देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बेशक करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन ज़रा सोचिए उस तरह का वोट देने का क्या मतलब जब आपका वोट उस सरकार के गठन में मदद करे जो आपके हितों का ख्याल न रखें। गठबंधन बनाकर ये लोग सब नाश कर देते हैं। बताईए हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं है। अगर मेरी लोकसभा सीट से सभी प्रत्याशी अयोग्य हैं तो मैं अपना वोट क्यों दूं? कल को अगर किसी आतंकी वारदात में आप मारे जाते हैं या कोई विकास कार्य नहीं होता है तो आपको ये मलाल नहीं रहेगा कि आपके चुने प्रतिनिधी और सरकार ने आपको उल्लू बनाया है। अब पता नहीं आपको क्या लगता है। कुछ लोग कहेंगे कि मेरी मति मारी गई है, कुछ लोग लोकतंत्र से उठ रही इस आस्था पर सवाल उठाएंगे। लेकिन मैं चाहता भी यही हूं कि आप आएं। तर्क देकर बताएँ कि मैं वोट क्या दूं?

(मेरे मित्र गुलज़ार अनवर ने मेल करके अपने विचार भेजे हैं, मैं उन्हें यहां यथावत प्रकाशित कर रहा हूं)

बुधवार, 11 मार्च 2009

कौन है ये गंदी लड़की

यूं ही बैठे-बैठे ब्लॉग्स पर कुछ सर्च कर रहा था। अचानक एक ब्लॉग में आ गिरा। ब्लॉग का नाम था गंदी लड़की । किसी लड़की ब्लॉग बनाया था। जियो अपनी ज़िंदगी, करो अपनी मनमर्जी, उन्हें कहने दो हमें-तुम्हें गंदी लड़की.... ये है उस ब्लॉग का विवरण। साफ है जिस किसी ने भी ये ब्लॉग बनाया है, उसने एक क्रांतिकारी विचार सामने रखा है। इस ब्लॉग पर जाएंगे तो आपको एक अलग ही अहसास होगा। ऐसे धारदार विचार जो एक बारगी आपको सोचने के लिए मजबूर कर देंगे। ऐसी बातें जो भले ही आप-हम खुले तौर पर स्वीकार नहीं करते हों, उन्हीं बातों को दिलखोल कर लिखा है गन्दी लड़की ने। पहली निगाह डालेंगे तो लगेगा कि किसी ऐसी लड़की ने इस ब्लॉग को माध्यम बनाया है जिसे इस समाज ने, खासकर पुरुषों ने बहुत दुख दिया है। लगातर लगी चोटों से घायल उस लड़की ने हार न मानकर एक रौद्र रूप अपनाया है। गुमनाम ही सही लेकिन अपने विचारों को, अपनी भड़ास को बाहर निकाल रही है। ऐसी खरी-खरी बातें कर रही है। दुख की बात ये है कि पिछले एक साल से गंदी लड़की ने कुछ नहीं लिखा। आखिर है कौन ये गन्दी लड़की जो वास्तव में आईना है, वह आईना समाज जिसमें अपना गन्दा चेहरा देखकर आईने को गन्दा करार दे रहा है। स्नोवा वार्नो की तरह की रहस्य है यह लड़की। हम नहीं चाहते कि गन्दी ल़ड़की खुल कर सामने आए, लेकिन हम ये चाहते हैं कि गन्दी लड़की फिर से लिखना शुरु करे। क्योंकि हमें चाहिए एक ऐसा ठेकेदार, जो नारी हितों की बात करता रहे। और सिर्फ बातें ही नहीं करे बल्कि कुछ सकारात्मक करे। तो आप जानते हैं कि कौन है ये गन्दी लड़की?